Invest in yourself & just whatever you do, give your 100%

कुल Investments 3

आप जो काम कर रहे हैं उसमें आपकी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से ‘Investment’ होनी चाहिए। आपको अपने काम के उद्देश्य के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। यह जानना बहुत जरूरी है कि आपका काम सिर्फ जीने का जरिया नहीं बल्कि व्यापक अर्थों में उसकी उपयोगिता है। जो काम हम कर रहे हैं उसके अंतिम परिणाम का एहसास जब हमे होता है, तो हमे उसमें खुदको पूरा झोंक देने का दृष्टिकोण विकसित होता हैं। आपका नजरिया बदल जाता है, इससे आपके काम की उपयोगिता और गुणवत्ता भी बढ़ती है। चाहे आपका खुद का बिजनेस हो या नौकरी, अगर आप अपने काम में पूरी तरह ‘Invest’ हैं तो आप कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल कर सकते हैं।

एक प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा छोटा सा गाँव था। गाँव के बाहर एक सुन्दर नदी बह रही थी। क्योंकि गाँव रस्ते के Side ही है, इसलिए कई विद्वान और संत सद्भावना के साथ गाँव में आते थे। ऐसे ही एक संत एक बार सुबह के समय गाँव की नदी के किनारे टहल रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि पास में ही कई लोग पत्थर तोड़ने का काम कर रहे थे. उत्सुकतावश उन्हों ने पास ही के एक मजदूर से पूछा, ”तुम क्या कर रहे हो?” उसने थोड़े गुस्से से जवाब दिया, ”देखते नहीं, मैं पत्थर तोड़ रहा हूं?” मजदूर का यह जवाब सुनकर उन्हें थोड़ा दुःख हुआ, लेकिन वह आगे बढ़े और दूसरे मजदूर से भी वही सवाल पूछा।

हालाँकि, उन्होंने उत्तर दिया, “सर! मैं अपनी और अपने परिवार की आजीविका के लिए पत्थर तोड़ने का काम करता हूँ।” इस उत्तर से उन्हें थोड़ी संतुष्टि हुई, लेकिन क्या ये लोग इतने सीमित उद्देश्य से काम करते हैं? ऐसा उन्होंने सोचा होगा, उन्होंने अपनी खोज जारी रखी। वह तीसरे मजदूर के पास जाकर उन्हों ने पूछा, “तुम क्या कर रहे हो?” मजदूर ने कहा, “सर! हम अपने गांव के लोगों की सुविधा के लिए यहां एक मंदिर का निर्माण कर रहे हैं और इसके लिए आवश्यक पत्थर बनाने का काम मैं कर रहा हूं।” यह उत्तर सुनकर संत बहुत प्रसन्न हुए और प्रसन्न होकर आगे बढ़ गए।

पहली ‘Investment’

आइए अब हम इनमें से प्रत्येक व्यक्ति द्वारा दिए गए उत्तरों, और उससे उनकी मानसिकता और समग्र परिणामों का पता लगाएं। पहला आदमी सिर्फ एक ‘Investment’ यानी सिर्फ हाथ का इस्तेमाल करके अपना काम कर रहा था। तो उसे अपनी आंखों के सामने लगातार पत्थर दिखाई देंगे और वह ऐसे काम से बहुत थक जाएगा। जब वह घर जाएगा तो अपना गुस्सा अपने परिवार पर उतारेगा। तो परिवार के लोग भी उसके प्रति ज्यादा प्यार और सम्मान महसूस नहीं करेंगे।

दूसरी ‘Investment’

दूसरा आदमी काम करते समय हमेशा परिवार के बारे में सोचेगा। काम के बाद खुशी-खुशी घर लौटेगा। घर पर परिवार वाले भी उनका बेसब्री से इंतजार कर रहे होंगे। पहले और दूसरे आदमी में यह अंतर एक ‘Investment’ की बढने के कारण है।

तीसरी ‘Investment’

जहां तक ​​तीसरे आदमी की बात है, वह कार्यस्थल पर, घर पर और पूरे समाज में सबको अच्छा लगता होगा। इसका मतलब यह है की पहले आदमी की अपने काम में ‘Investment’ केवल एक ‘Investment’ हाथ की यानी सिर्फ शारीरिक रूप से होती है। दूसरे आदमी की दो ‘Investment’ अपने काम में है। हाथ और सिर, शारीरिक और मानसिक, जबकि तीसरे कार्यकर्ता की अपने काम में कुल तीन ‘Investment’ है – शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक। इससे यह प्रतीत होता है कि इतने कुल ‘Investment’ के कारण, ये तीसरा व्यक्ति अपने काम को अच्छी तरह से करके सभी मजदूरों के बीच अपने किये हुए काम की संतुष्टि भी प्राप्त करता होगा। मतलब की, जो व्यवस्थापक( Manager) ऐसे अच्छी गुणवत्ता वाले Employees चाहता हैं,उसने उस तरह के लोगों को तैयार करने के लिए सही माहौल बनाने की कोशिश करनी चाहिए।

अब सोचिए कि आपके अधीन काम करने वाले और आपके साथ काम करने वाले लोग आपके काम को कैसे देखते हैं। पहले व्यक्ति की तरह, दूसरे व्यक्ति की तरह या तीसरे व्यक्ति की तरह? ये सभी लोग अपने काम को पूरा समझके स्पष्टता से के साथ काम करते हैं? टाटा मोटर्स में, ऐसा ही एक मैनेजर था। जो हमेशा अपने कर्मचारियों से एक सवाल पूछता था, “आपको क्या लगता है कि टाटा मोटर्स क्या करती है?” उन्हें जवाब मिलता था “लाखों गाड़ियाँ बना रही हैं” तब वो उन्हें समझाते थे कि, क्या आप जानते हैं कि जब हमारी एक गाडी बाज़ार में जाती हैं, तो सात लोगों को आजीविका का साधन मिलता है। इसका मतलब यह है कि लाखों गाड़ियाँ बनाकर हम सभी अपने देश में गरीबी दूर करने के लिए वाहनों का योगदान दे रहे हैं।

अच्छे व्यवस्थापक का रहस्य

जब हमें अपने काम के अंतिम परिणाम का एहसास होता है, तो हम उस तीसरे व्यक्ति की तरह अपने काम में खुदको पूरी तरह से ‘Invest’ करते हैं। यह हमारे काम की उपयोगिता और गुणवत्ता को भी बढ़ाता है और हमें इस तरह का कार्य व्यस्तता से उच्च स्तर की संतुष्टि देता है। हम निश्चित रूप से स्वयं ऐसा ‘Invest’ कर सकते हैं। इसके लिए उपयुक्त वातावरण बनाना आवश्यक है। अच्छे व्यवस्थापक का सार आपके संगठन के अंतिम लक्ष्य, उद्देश्य को सभी Employees तक पहुंचाना और उन्हें इसमें शामिल करना है। यदि इसे अच्छी तरह से किया जाए तो ही एक सामान्य संगठन को एक बेहतर, आदर्श संगठन में बदला जा सकता है।

कुल ‘Investment’ का महत्व

संक्षेप में, यह कहा जा सकता है कि संगठन तभी आगे बढ़ेगा जब संगठन का प्रत्येक व्यक्ति अपने काम को ठीक से समझेगा और पूरा योगदान देगा। हमारे काम का परिणाम अपने पूरे संगठन के कामयाबी पे कैसे होगा, ये ध्यान में रखते हुए जब वो व्यक्ति काम करेगा तब ही अद्वितीय काम करनेवाली संगठनाये तयार हो सकती है और तब ही हमारा देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी के जीवन का एक प्रसंग यहाँ स्पष्ट रूप से याद किया गया है। उस समय फ्लोरिडा का’ कैनेडी रिसर्च सेंटर’ चंद्रमा पर इंसानों को उतारने की योजना पर काम कर रहा था। इसका निरीक्षण करने के लिए जब जॉन एफ. कैनेडी एक बार वहां गए तो एक महिला कर्मचारी उन्हें शर्म से देख रही थी।

कैनेडी स्वयं उसके पास आये और उससे पूछा, “तुम यहाँ क्या कर रही हो?” महिला ने अपने बालों में हाथ फिराते हुए उत्तर दिया, “मैं चंद्रमा पर एक आदमी को भेजने के अमेरिका के सपने में मदद कर रही हूं।”

इसका मतलब यह है कि हम अपने काम के मुख्य उद्देश्य और उस संगठन के उद्देश्य को पूरी तरह से समझते हैं जिस संगठन में हम काम कर रहे हैं। कुछ ही दिनों में अमेरिका ने नील आर्मस्ट्रांग को चंद्रमा पर उतारा और उनका सपना पूरा किया। इस काम में तीसरा आदमी जिसने पत्थर तोड़ा था उस जैसे, कई आदमी शामिल थे। कैनेडी प्रशासन प्रत्येक आदमी के मन में अपना सपना स्थापित करने में सफल रहा और प्रत्येक आदमी ने एक अमेरिकी व्यक्ति के चंद्रमा पर कदम रखने का सपना देखा। प्रत्येक आदमी की इस काम में पूरी तरह से ‘Investment’ थी और इसलिए वह इस कठिन सपने को साकार करने में सक्षम थे।

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