Co-operation is BEST, सहयोग सर्वोत्तम

सहयोग सर्वोत्तम है

असफलता के बाद भी निराश हुए बिना प्रयास करते रहें। चपलता और दृढ़ता हमेशा सुस्ती और निष्क्रियता को मात देती है। अपनी मूल क्षमताओं के अनुसार अपना कार्यक्षेत्र चुनें। प्रतिद्वंद्वी की स्थिति के अनुसार लड़ें। उपकरणों के उचित उपयोग के साथ समूह में काम करना अकेले काम करने की तुलना में अधिक प्रभावी है। एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने से बेहतर है कि साथ आकर स्थिति पर काबू पाना ज़्यादा उचित है। तो आइए, एक-दूसरे की मदद करें, एक मजबूत समूह बनाएं और काम पर लग जाएं।

कछुए और खरगोश के बीच इस बात पर विवाद पैदा हो गया कि कौन तेज़ दौड़ सकता है और अंतिम स्थान हासिल कर सकता है। खरगोश और कछुआ दोनों दावा करते है कि “मैं इस लक्ष्य को जल्दी हासिल कर सकता हूँ”। अंततः, वे वास्तविक दौड़ लगाकर इस विवाद को सुलझाने का निर्णय लेते हैं। दौड़ का स्थान भी निर्धारित हो जाता है और दौड़ शुरू हो जाती है।

Consistency is key

खरगोश शुरूवात बड़ी तेजी से करता है , लेकिन कुछ दूरी तय करने के बाद वह थोड़ा थक जाता है।
जब उसने देखा तो कछुआ बहुत दूर रह गया होता है। खरगोश सोचता है कि पेड़ के नीचे थोड़ा आराम करना चाहिए और तरोताजा होकर दौड़ पूरी करनी चाहिए। कछुआ इतना पिछड़ा है कि वह कभी भी मेरी बराबरी नहीं कर पाएगा। खरगोश एक पेड़ के नीचे रुक जाता है। वह अंग लगाकर सो जाता है। मुश्किल से चलने वाला कछुआ खरगोश से आगे निकल जाता है और निस्संदेह, अपनी दौड़ पूरी करके प्रतियोगिता जीतता है। खरगोश जाग जाता है और यह देखकर दुखी होता है कि वह हार गया है।

बोध: जो लोग चुपचाप और लगातार काम करते हैं वे दौड़ जीतते हैं।

गति महत्वपूर्ण

प्रतियोगिता के अप्रत्याशित परिणाम से परेशान होकर खरगोश आत्मनिरीक्षण करता है। उसे एहसास होता है कि वो अति आत्मविश्वास, लापरवाही और आलस्य के कारण दौड़ हार गया हैं। अगर वो चीजों को हल्के में नहीं लेता तो दौड़ नहीं हारता। खरगोश कछुए के पास आता है और उसे फिर से दौड़ के लिए चुनौती देता है। कछुआ भी दौड़ के लिए तैयार हो जाता हैं और फिर वो अपनी दौड़ शुरू कर देते हैं। इस समय खरगोश शुरू से अंत तक बिना कहीं रुके, बिना लापरवाही किये लगातार दौड़ता रहता है और कछुए को बहुत पीछे छोड़कर रेस जीत जाता है।

बोध: सातत्य और स्पीड हमेशा धीमे को हरा देता है।

…लेकिन ये कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती.
अब कछुआ वापस सोचता है कि जिस तरह से हमने प्रतियोगिता आयोजित की है, वैसे तो मैं कभी भी दौड़ जीत नहीं पाउंगा। तो मुझे क्या करना चाहिए? वह सोचता है कि वह दौड़ कैसे जीत सकता है और खरगोश के पास वापस चला जाता है। वो खरगोश को प्रस्ताव देता है कि फिर से हम एक अलग रास्ते से दौड़ लगाएं। खरगोश भी उसकी बात से सहमत हो जाता है और प्रतियोगिता की तैयारी करता है।

आप की क्षमता को पहचानें

खरगोश और कछुए के बीच दौड़ जोरों से शुरू होती है। खरगोश सातत्य और तेजी से दौड़ता है। कछुआ धीरे-धीरे अपना रास्ता बनाता है, लेकिन दौड़ ख़त्म होने से दो-तीन किलोमीटर पहले एक नदी होती है। नदी को देखकर खरगोश बहुत भ्रमित हो जाता है और ‘अब क्या करें?’ इसी सोच में डूबता है, तभी कछुआ टर्र-टर्र करता हुआ आता है और नदी में तैरकर अपनी प्रतियोगिता पूरी करता है। बेशक एक बार फिर कछुआ दौड़ जीत जाता है।

बोध: पहले अपनी सर्वश्रेष्ठ योग्यताओं को जानें।

ऐसा करियर चुनें जो आपकी क्षमताओं से मेल खाता हो। जिस संगठन में आप काम करते हैं, यदि आप एक अच्छे वक्ता हैं, तो उसके लिए सही अवसर खोजें और अपने कौशल को प्रबंधन के ध्यान में लाएँ।
यदि आपमें लगाव के साथ निर्णय लेने की अच्छी क्षमता है, तो काम पूरा करें, रिपोर्ट तैयार करें और वरिष्ठों को भेजें। अपनी मूल क्षमताओं पर काम करके, आप न केवल दूसरों द्वारा याद किए जाएंगे, बल्कि अपने लिए महान अवसर भी पैदा करेंगे और निश्चित रूप से खुद को सही उन्नति की ओर ले जाएंगे। …अभी भी ये कहानी ख़त्म नहीं हुई है।

सहयोग महत्वपूर्ण

हालाँकि दुनिया में प्रतिस्पर्धा महत्वपूर्ण है, लेकिन एक-दूसरे की मदद करके परिस्थितियों पर काबू पाना अधिक महत्वपूर्ण है। लड़ाई एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, बल्कि जो परिस्थिति बनती है उसके खिलाफ होनी चाहिए। संघर्ष से अधिक महत्वपूर्ण है सहयोग। इससे इसमें भाग लेने वाले सभी लोगों को अधिक सफलता मिलती है। दौड़ की इस अवधि के दौरान, खरगोश और कछुआ अच्छी तरह से परिचित होते हैं। वे सोचते हैं कि पिछली प्रतियोगिता में वे बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे। इसलिए वे एक बार फिर ऐसी ही प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्णय लेते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने इस प्रतियोगिता को ‘GROUP’ में आयोजित करने का निर्णय लेते है।

दोनों को ये आइडिया बहुत पसंद आता है और बड़े उत्साह के साथ उनकी रेस एक बार फिर शुरू हो जाती है। इस समय, शुरू में दौड़ते हुए, खरगोश कछुए को अपनी पीठ पर ले जाता है और जाल के माध्यम से बड़ी तेजी से यात्रा करता है और नदी के किनारे तक पहुंच जाता है। अभी कछुआ खरगोश को अपनी पीठ पर बैठा लेता है और तैरकर नदी पार कर जाता है। नदी तट पर पहुँचकर वापस खरगोश कछुए को अपनी पीठ पर बैठा लेता है और दोनों बहुत ही कम समय में दौड़ पूरी कर लेते हैं।

व्यक्तिगत क्षमता और बुद्धिमत्ता का होना अच्छा है,लेकिन अगर हम एक समूह के रूप में आ कर काम करें तो यह और भी बेहतर है। यदि हम सभी में मौजूद विभिन्न क्षमताओं का उपयोग करके काम नहीं करते हैं, तो हम काम में उत्कृष्टता हासिल नहीं कर पाएंगे। जब आप समूह में काम करते हैं तो कभी ना कभी ऐसा समय आएगा, की आपकी क्षमताएं कम हो सकती है तब आप समूहों के दूसरे लोगों के क्षमताओं का उपयोग कर सकते हैं। समूह में काम करते वक्त परिस्थिति रूप जिस व्यक्ती मे जो क्षमता है। वह व्यक्ति आगे बढ़कर, आपको जीत दिला सकता है।

अपनी असफलताओं के बावजूद खरगोश और कछुए ने हार नहीं मानी। असफलता के बाद खरगोश ने और अधिक मेहनत और लगातार मेहनत करने का फैसला किया। कछुआ शुरू से ही कड़ी मेहनत कर रहा था। असफलता के बाद उन्होंने अपनी चाल और रणनीति बदल ली।

जीवन में भी जब हम असफल होते हैं तो ज्यादा मेहनत लें कर काम करना सही है। कभी-कभी अपनी strategies, अपनी tricks को बदलना और कुछ नई idea लें कर execute करना फायदेमंद होता है। कई बार दोनों का सही इस्तेमाल करना पड़ता है, खरगोश और कछुआ अब भी कभी-कभी हमें सबक सिखाते हैं, यदि हम प्रतिद्वंद्वियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना बंद कर दें और साथ में आ कर परिस्थिती पर काबू पा लें, तो हम बहुत कुछ हासिल कर सकते है।

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