Action is better than guidance : RATAN TATA

मार्गदर्शन से बेहतर है कार्रवाई

कई चुनौतियों का सामना करते हुए, दुनिया के कई विशेषज्ञों के पीछे Ratan Tata सर ने असंभव को संभव कर दिखाया और ‘प्रॉमिस इज प्रॉमिस’ के नारे के साथ एक लाख की कार के सपने को साकार करके दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया।
न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में अनगिनत लोग ‘नैनो’ जैसी कारों के मालिक बन गए हैं। शायद उन्हें यह भी नहीं पता कि वैश्विक स्तर पर जो हस्तियां मशहूर और बड़ी हैं, वे भी बेहद सामान्य परिस्थितियों से गुजरी हैं। दुनिया भर में बड़े औद्योगिक समूह चलाने वाले लोग बहुत कर्तव्यनिष्ठ और कुशल हैं। यह वास्तविक घटना है जो टाटा कंपनी के एक अधिकारी ने बताई है।

उस समय Ratan Tata सर, टाटा उद्योग समूह के अध्यक्ष बने ही थे। हालाँकि यह घटना बहुत आम है, लेकिन यह इस बात का एक बहुत अच्छा उदाहरण है कि एक सुस्त बड़े समूह को विश्व स्तरीय समूह में बदलने के लिए एक नेता की क्यों ज़रूरत होती है। Ratan Tata सर ने सबसे दूरदर्शी और लगातार नेतृत्व प्रदान करके दुनिया के सबसे अफॉर्डबल और सबसे स्टाइलिश मोटर वाहन बनाने के अपने सपने को पूरा करके ऑटोमोबाइल उद्योग को एक नई दिशा दी।

कार्य-उन्मुख नेतृत्व

अमेरिका से जब J.R.D Tata सर ने उन्हें भारत बुलाया तो उन्हें टाटा समूह की कंपनी ‘नेल्को’ की जिम्मेदारी दी गई। इसी बीच नासिक में नेल्को कंपनी के कुछ उच्च अधिकारियो की एक बैठक आयोजित की गईथी, जिसके लिए Ratan Tata सर कुछ अन्य अधिकारियो के साथ नासिक जा रहे थे। हाईवे से गुजरते वक्त अचानक उनकी कार के टायर पंक्चर हो गए। जब ड्राइवर यह देखने के लिए नीचे उतरा कि क्या हुआ है, तो Ratan Tata सर सहित सभी अधिकारी अपने पैर हल्के करने के लिए बाहर निकले। ड्राइवर ने अपना काम शुरू कर दिया।
कुछ अधिकारियों को यह बदल अच्छा लगा, क्योंकि उन्हें यात्रा की थकान कम करने के लिए कुछ राहत मिली थी। उसी समय एक अधिकारी ने देखा कि Ratan Tata सर कहीं नजर नहीं आ रहे हैं, “कहाँ पे गये होंगे?” उन्होंने अपने अन्य साथियों से पूछा, क्या वे कहीं किसी पेड़ के नीचे, या पास के किसी होटल में कॉफी तो नहीं पी रहे होंगे? लेकिन Ratan Tata सर ऐसा कुछ भी नहीं कर रहे थे।

सहकर्मियों की खोजबीन के बाद थोड़ा अधीर होकर, वे सभी कार के पास आए, और देखते हैं, जब वे इधर-उधर समय गुजार रहे थे, Ratan Tata सर अपनी शर्ट से टाई हटाकर ड्राइवर को पंचर टायर को हटाने और पहिया बदलने में मदद कर रहे थे, कुशलता से जैक को संभाल रहे थे। वे टायर पर हाथ मारकर उसके अंदर की हवा चेक कर रहे थे। उनके चेहरों पर पसीना भी झलक रहा था, लेकिन साथ ही उनके चेहरे पर एक अच्छी मुस्कान और अपने सहयोगी की मदद करने की संतुष्टि थी।

अन्य अधिकारियों की क्या प्रतिक्रिया थी? मुझे इसका कोई अंदाज़ा नहीं था; लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने व्यवस्थापन का एक सुंदर सबक सीखा होगा, क्योंकि वास्तविक कार्य केवल सिद्धांत की तुलना में अधिक विचारोत्तेजक और अधिक स्मरणीय होता है। मोटर चालक इस घटना को अपने जीवन में कभी नहीं भूलेगा, बल्कि वह दूसरों को इसके बारे में बताएगा। महान नेता कार्य करके नेतृत्व करते हैं और अपनी ‘टीम’ को महान सबक देते हैं।

मुझे ‘Soichiro Honda’ और ‘J.R.D. Tata’ सर की Biography में भी ऐसे कुछ उदाहरण पढे हुए याद है। अपने सहकर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने से हर किसी को एक अलग प्रेरणा मिलती है। वे चेतना से भर जाते हैं। वे ऊंच-नीच के भेदभाव के बिना अपने नेताओं द्वारा निर्धारित किये हुए लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये उनमें जुनून आता हैं। इससे हमारे कार्य के प्रति हमारी निष्ठा बढ़ती है। यह भावना भी बढ़ जाती है कि मैं इसलिए काम नहीं करता कि कोई मुझे देख रहा है, बल्कि इसलिए क्यूंकी मुझे काम करना है।

ऐसे नेतृत्व को किसी बड़े अवसर, बड़े संघर्ष या बड़ी चुनौती की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि नेतृत्व की महानता रोजमर्रा की साधारण घटनाओं में देखी जा सकती है। पंचर बनाने वाले ड्राइवर की मदद करने जैसी स्थितियाँ अक्सर हमारी दिनचर्या में आती रहती हैं। ऐसी स्थितियों में नेता अपनी टीम के सदस्यों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, यह नेतृत्व की गुणवत्ता का माप है और यह अनुमान लगा सकता है कि नेता कठिन परिस्थितियों में कैसा व्यवहार करेंगे।

प्रॉमिस इज प्रॉमिस

सामान्य तौर पर, आज के युवा मैनेजर अपनी ऊर्जा और बुद्धि इस बात पर खर्च करते हैं कि अपने वरिष्ठों को कैसे खुश किया जाए। यद्यपि यह आवश्यक है, परंतु इस बात पर भी उचित ध्यान देना चाहिए कि यदि आप अपनी ‘टीम’ के सहकर्मियों पर ध्यान देकर उनकी मदद करेंगे तो आपका काम अधिक उपयोगी और प्रभावी हो सकता है। यह Ratan Tata सर का दृष्टिकोण ही था जिसने उनके सहयोगियों और टीम के युवा, उभरते अधिकारियों को ‘आपको एक ऐसा उत्पाद देने के लिए प्रेरित किया जिसे दुनिया पसंद करेगी और टाटा नैनो की तरह वैश्विक ख्याति प्राप्त करेगी। क्योंकि उनकी ‘टीम’ का हर व्यक्ति एक दूसरे की मदद करके काम कर रहा था।

‘एक टीम, एक लक्ष्य’ का तीर पल-पल महसूस होता रहा और इसलिए वे दुनिया की सबसे अफॉर्डबल “एक लाख” की कार बनाने में सफल रहे। Ratan Tata सर ने नेतृत्व का कितना अनोखा उदाहरण हम सबके सामने रखा हैं।
Ratan Tata सर ने कई चुनौतियों का सामना करते हुए असंभव को संभव कर दिखाया। उन्होंने प्रॉमिस इज प्रॉमिस के नारे के साथ ‘एक लाख’ की कार का सपना साकार कर के दुनिया को चौंका दिया। न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में अनगिनत गरीब लोग ‘नैनो’ जैसी कारों के मालिक बन गए हैं। शायद उन्हें यह भी पता नहीं होगा कि वैश्विक स्तर पर जो शख्सियतें मशहूर और बड़ी बनती हैं, वे बेहद सामान्य परिस्थितियों में से गई होती हैं।

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